बुधवार, 27 नवंबर 2024

ईश्वर और भगवान में अन्तर

अक्सर कुछ अज्ञानियों द्वारा सनातन धर्म के लोगों पर यह टिप्पणी की जाती है कि उनके कितने भगवान हैं उन्हें खुद पता नहीं है और भगवान या खुदा एक है सनातन धर्म के लोग मूर्खता करते हैं l
उन लोगों से हम यह निवेदन करना चाहेंगे कि कृपया व सनातन धर्म को समझें और उसके बाद टिप्पणी करें सनातन धर्म भी एक ही ईश्वर में विश्वास रखता है , एक ही ईश्वर को मानता है, 
ईश्वर शब्द  ईश धातु और वर्छ प्रत्यय शब्द से बना हुआ है इसका मतलब होता है मालिक या स्वामी ll
ईश्वर उसे कहते हैं जो सृष्टि का निर्माण किए हुए हैं जो सृष्टि का मालिक है वह ईश्वर है l
दूसरा सवाल है तो फिर भगवान किसे कहते हैं तो भग शब्द संस्कृत का शब्द है जिसका का मतलब होता है कल्याण करने वाला, संरक्षक , जिसमें भी कल्याण के  गुण हैं  संरक्षण के गुण हैं वह भगवान है, और कल्याण या संरक्षण कई प्रकार से हो सकता है कई प्रकार का हो सकता है इसीलिए सनातन धर्म में भगवान के प्रकार भी अलग है भगवान  किसी ना किसी रूप में होता है l
और विष्णु पुराण के पांचवें अध्याय में महर्षि पराशर के अनुसार वे लिखते हैं  कि भगवान उसे कहते हैं जिसमें निम्नलिखित गुण हो यानी
 ऐश्वर्य /धर्म/ यश/ श्री/ ज्ञान और वैराग्य l
 यह  गुण किसी में भी हो सकते हैं और हम उसे भगवान कह सकते हैं ईश्वर में भी है यह गुण है और वह भी भगवान है l
 मनुष्य में भी ये  गुण हो सकते हैं, कोई साधारण व्यक्ति या महापुरुष कोई साधु ,संत कोई सामान्य जन  जिसमें  भी हो उसे भगवान के रूप में  पूज सकते हैं l
वैदिक परंपरा के अनुसार जो भी हमारा कल्याण करता है जो भी हमारा संरक्षण करता है सभी भगवान है इसीलिए हम अच्छे मनुष्य और अच्छी वनस्पति और सृष्टि के पंचतत्व सब की पूजा भगवान मान कर करते आ रहे  हैं l संक्षेप में एक उदाहरण से बता दूं कि महाभारत  वाले अर्जुन के सारथी कृष्ण को हम भगवान श्री कृष्ण कहते हैं लेकिन  गीता के उपदेश देते समय एक विशेष समय महाभारत में आया था जब उन्होंने अपना विराट स्वरूप  प्रदर्शित किया था, अर्जुन को छोड़ कर लगभग सब की आंखें बंद हो गई थी और तब उन्होंने कहा था मैं स्वयं ईश्वर हूं लेकिन मनुष्य रूप में उन्हें भगवान श्री कृष्ण ही कहा जाता है l
भगवान श्री कृष्ण के ईश्वर रूप  को कोई नहीं देख पाया था l
इसीलिए सनातन धर्म में भी कल्याण और संरक्षण के  विविध आधार पर भगवान  की पूजा की जाती है भगवान के चित्र बनाए जाते हैं भगवान के मंदिर बनाए जाते हैं लेकिन पूरे विश्व में ईश्वर का कहीं कोई मंदिर नहीं है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के ईश्वर रूप को किसी ने नहीं देखा था l
सनातन धर्म में इसीलिए आंख बंद करके ध्यान लगाने की व्यवस्था है जहां हम ईश्वर से साक्षात्कार कर सकते हैं l सनातन धर्म भी एक ईश्वरवाद में ही विश्वास रखता है l  ..     ( रामदेव द्विवेदी, सम्पादक_ ऊँ टाइम्स )